आत्महत्या का ख्याल क्यों आता है? | Bipolar disorder in Hindi

(Bipolar disorder) बाइपोलर डिसऑर्डर नाम की एक बीमारी का जिक्र करते हुए, जाने मने पॉप सिंगर हनी सिंह ने कहा की वह इस बीमारी से कई सालों तक पीड़ित रहे, और उनको इस दौरान आत्महत्या करने का ख्याल आता था। वह बतातें हैं की यह बहुत ही खतरनाक बीमारी है। ...

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Akash Yadav

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(Bipolar disorder) बाइपोलर डिसऑर्डर नाम की एक बीमारी का जिक्र करते हुए, जाने मने पॉप सिंगर हनी सिंह ने कहा की वह इस बीमारी से कई सालों तक पीड़ित रहे, और उनको इस दौरान आत्महत्या करने का ख्याल आता था। वह बतातें हैं की यह बहुत ही खतरनाक बीमारी है।

तो आज की इस ब्लॉग पोस्ट में चलिए जानते हैं की क्या है बाइपोलर डिसॉडर, इसके लक्षण, कारण, और उपचार क्या है?

बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है?

बाइपोलर डिसऑर्डर एक तरह की मानशिक बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति का मूड, सोचने, व्यवहार करने, में  बहुत तेजी से बदलाव आता है, इसलिए इसे मूड डिसऑर्डर कहना भी गलत नहीं होगा।

यह बीमारी कई महीने, हप्तों, साल तक रह सकता है और मरीज के रोज मर्रा की जिंदगी को भी बाधित करती है।

बीपोलेर डिसऑर्डर के मरीजों का मूड बहुत तेजी से बदलता है और  हाइपोमेनिक / मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड जैसी अवस्थाएं देखने को मिलती है। लेकिन बीपोलेर डिसऑर्डर में हाइपोमेनिक / मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड जैसे अवस्था हमेशा नहीं रहती है।

लगभग 100 में से 1 व्यक्ति अपनी जिंदगी में कभी न कभी इस बीमारी का अनुभव करता है लेकिन इस बीमारी के समान्य लक्षणों के कारण कई लोग इसे समझ ही नहीं पते हैं। और यह बीमारी पुरुष या महिला किसी को भी हो सकती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रकार

बीपोलर डिसॉडर के 4 प्रकार हो सकते हैं:-

  1. बाइपोलर 1 डिसऑर्डर
  2. बाइपोलर 2 डिसऑर्डर
  3. साइक्लोथिमिक डिसऑर्डर 
  4. अन्य 
  • बाईपोलर 1 डिसऑर्डर :-

बीपोलेर 1 से पीड़ित वयक्ति अत्यधिक उत्तेजना (manic), तेजी, ऊर्जा, और बड़े बड़े काम करने की बातें सोचने और करना जैसे चीजों का अनुभव करता है। लेकिन हो सकता है वह की वह अत्यधिक उत्तेजना के साथ उदासी का भी अनुभव करे। लेकिन इसमें उत्तेजना का लेवल उदासी से ज्यादा होता है ।

हालाँकि बीपोलारे 1 में होने वाली उदासी का इलाज करने की जरूरत नहीं होती है, पीड़ित व्यक्ति में उदासी का लक्षण 1 या 2 हप्ते ही रहते हैं।

  • बाईपोलर 2 डिसऑर्डर :-

बाइपोलर 2 से पीड़ित व्यक्ति में अत्यधिक उदासी अनुभव करता है लेकिन थोड़ा उत्साह (hypomanic) भी अनुभव कर सकता है।

बाइपोलर 2 में होने वाल उत्साह उतना ही होता है जितना बाइपोलर 1 से पीड़ित व्यक्ति को होता है।

  • साइक्लोथिमिक डिसऑर्डर  (Cyclothymic disorder):-

इस डिसऑर्डर को  साइक्लोथिमिया भी कहा जाता है। इससे पीड़ित व्यक्ति में बाइपोलर 1 और 2 दोनों के ही लक्षण देखने को मिलते हैं, लेकिन इनमे तीर्वता का अंतर होता है।

साइक्लोथिमिया से पीड़ित व्यक्ति में थोड़ा उत्साह (hypomania) और थोड़ा उदासी (mild depression) कम से कम दो साल तक महसूस करता है। हो सकता है की व्यक्ति समान्य मनोदशा का भी अनुभव करे लेकिन यह 2 हप्ते तक ही रहती है।

कई बाद व्यक्ति बाइपोलर डिसऑर्डर का अनुभव करता है लेकिन ऊपर बताये गए तीनो प्रकारों में से मैच नहीं करता है  तो उसे अन्य बीपोलेर डिसऑर्डर के प्रकार में रखते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण

बाइपोलर डिसॉडर के लक्षण क्या है यह इस बात पर निर्भर करते हैं की वह किस प्रकार का बाइपोलर डिसॉडर है। इसके लक्षण भी अलग अलग लोगों पर अलग अलग देखे जाते हैं और समय की साथ बदलते भी रहते हैं।

हालाँकि एक समान्य लक्षण यह की बाइपोलर डिसॉडर के पीड़ित व्यक्ति का मूड बहुत तेजी से बदलता है जो कई लोगों को पागलपन भी लग सकता है।

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उन्माद से जुड़े बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण:-

इसके लक्षण ज्यादातर बाइपोलर 1 डिसऑर्डर में देखने को मिलते हैं जो जरूरत से ज्यादा असमान्य हो जाते हैं।

  • जरूरत से ज्यादा उत्साह, खुसी, या आशा होना
  • बेचैनी
  • नीद ना लगाना
  • जोखिम भरा काम करना
  • उत्साह के कारण सही निर्णय ना कर पाना
  • नशा करने लगाना
  • अपने आप को ज्यादा महत्व देना, जिस कारण लोगों को अपने से निचे समझना।
  • भ्रम में रहना 
  • अत्यधिक सोचना
  • सेक्स या अन्य आनंददायक गतिविधियों के लिए अत्यधिक भूख होना

बाइपोलर 1 डिसॉर्डर से पीड़ित ब्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्यों के नकारात्मक परिणामों से अनजान होता है। बेशक वह व्यक्ति अपने व्यवहारों में आये बदलावों को महशूश नहीं कर पता है लेकिन दुसरे व्यक्ति उसके व्यवहारों को आसानी से नोटिस कर पते हैं।

मेमिक बीपोलेर डिसऑर्डर में उत्साह इस स्तर तक बढ़ जाता है की व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है और दूसरों को भी हानि पंहुचा सकता है।

हाइपोमेनिया के लक्षण:-

बाइपोलर डिसऑर्डर में लोगों को कम उत्साह वाले लक्षण देखने को मिलते हैं, और ऊपर बताये गए लक्षण ही होते है लेकिन इनकी गंभीरता कम होती है।

जो खतरनाक नहीं होता है और रोजमर्रा के कामों में कोई खास बाधा नहीं डालता है लेकिन आपके आस पास के लोग आपमें आये परिवर्तन को नोटिस करते है।

और हो सकता है की हाइपोमेनिया आगे चलकर मेनिक (Manic) या  एक अत्यधिक उदासीनता में बदल जाये।

उदासीनता से जुड़े बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण:-

उड़नसिनता से जुड़े बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण अधिकतर बाइपोलर 2 डिसऑर्डर में देखने को मिलते हैं। यह व्यक्ति के लिए बहुत खतरनाक भी हो सकता है।

  • बहुत अधिक उदासी
  • हमेशा थकन और काम ऊर्जा महसूस करना
  • चिड़चिड़ापन
  • आत्महत्या के ख्याल आना
  • आपने आपको मूलयहीन समझना
  • नीद में कमी आना या नहीं जरूरत से ज्यादा लगाना।
  • नेगेटिव ख्याल आना
  • जरूरत से ज्यादा सोचना
  • अपने और दूसरों पर भरोसा ना होना

अगर आपको आत्महत्या के ख्याल आते हैं तो किसी डॉक्टर से जरूर सम्पर्क करें या  आपके साथ 24 घंटे किसी ना किसी का होना जरूरी है, कोई यैसा जिससे आप अपने मन की बात साँझा कर सकें और दीमक में चल रहे ख्यालों के बोझ को कम कर सकें।

बाइपोलर डिसऑर्डर के करक और कारण

बाइपोलर डिसऑर्डर होने का मुख्य कारण अभी तक अज्ञात है।

लेकिन रिसर्चर के अनुसार यह होने का एक मुख्य कारण अनुवांशिक हो सकता है। क्योकि यैसा पाया गया है की  बाइपोलर डिसऑर्डर वाले दो-तिहाई से अधिक मरीजों में कम से कम एक मरीज के परिवार में इस बीमारी की हिस्ट्री होती है।

हालाँकि कुछ यैसे करक हो सकते हैं जो इस इस बीमारी को बढ़ने में जिम्मेदार होते हैं।

  • अनुवांशिक :- अगर परिवार में किसी व्यक्ति को यह बीमारी में होती है तो उसकी आने वाली पीढ़ी में इस बीमारी के लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
  • मस्तिष्क में परिवर्तन :- रिसर्चर के द्वारा यह पाया गया है की जिन लोगों को बाइपोलर डिसऑर्डर की संभावना होती है, मस्तिष्क में पाए जाने वाले रसायनों में आने वाले परिवर्तन या  जिसमे मस्तिष्क की कुछ संरचनाये जरूरत से ज्यादा बड़ी हो जाती है।
  • पर्यावरणीय कारक :- यैसी स्थितियां जिसमें व्यक्ति अत्यधिक दुःख और तनाव महसूस करता है, जो बाइपोलर डिसऑर्डर होने का प्रमुख कारण बन सकता है जैसे पैसे के कमी, परिवार में किसी की मृत्यु, खराब रिलेशन, गंभीर बीमारी, एक्सीडेंट आदि।

बाइपोलर डिसऑर्डर के लिए उपलब्ध इलाज 

बीपोलेर डिसऑर्डर का इलाज करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है यह व्यक्ति के बीमारी का प्रकार और स्टेज पहचानने के बाद किया जाता है। जिसे दवाइयों की मदत से, साइकोथेरेपी, या लाइफस्टाइल में बदलाव।

दवाइयों के माध्यम से इलाज:-

डॉक्टर आपको विभिन्न प्रकार की दवाइयों को दे सकता है जैसे-

  • एंटी साइकोटिक्स
  • मूड स्टेबलाइजर
  • एंटी डिप्रेसेंट
  • एंटी एंजाइटी मेडिसिन

हालाँकि इन दवाइयों के कई साइडएफेक्ट भी हो सकते हैं इसलिए किसी भी प्रकार की दवाई का प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

साइकोथेरेपी के माध्यम से इलाज:-

  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (Cognitive Behavioral Therapy):- इस थेरेपी को आसान भाषा में टॉक थेरेपी भी कहा जाता है। जिसका उद्देश्य आपके सोचने और व्यव्हार करने के तरीकों में बदलाव लाना होता है और आपके मानसिक स्थिति से आपको अवगत करना होता है।
  • इंटरपर्सनल एंड सोशल रिदम थेरेपी (Interpersonal and social rhythm therapy) (IPSRT):- इस थेरेपी के द्वारा आपके नियमित क्रियाकलापों और कार्यों पर नजर रखा जाता है जैसे की सोना, जागना, खाना खाना, और आपके व्यवहारों पर भी नजर रखा जाता है।
  • साइकोएजुकेशन:- इसके माध्यम से मरीज और उसके परिवार को मानशिक बीमारी से अवगत कराया जाता है की बीमारी की स्टेज क्या है, इसका निदान क्या है, और इलाज का प्रोसेस क्या है, आदि। इस प्रोसेस के माध्यम से रोगी को बीमारी समझने में मदत मिलती है और इलाज कर पाना आसान हो जाता है।
  • अन्य थेरेपी:- बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारी का कोई खास एक इलाज नहीं होता है, जो इलाज रोगी पर काम कर सकता है डॉक्टर उस इलाज का इस्तेमाल करता है इसलिए डॉक्टर अपनी एक्सप्रिएंस से किसी भी प्रकार से रोगी में सुधर लेन की कोशिश कर सकता है।

लाइफस्टाइल में बदलाव के माध्यम से इलाज

जीवनशैली में बदलाव लाने से कई तरह के मानसिक बिमारियों का इलाज कर पाना संभव है, इसलिए डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव लेकर आने की सलाह जरूर देते हैं,

  • नियमित व्ययाम:- व्ययाम मानसिक बिमारियों में लाभ लेन में बहुत कारगर साबित होता है, इसके अलावां ओवरआल हेल्थ में भी सुधर लता है। इसलिए यह बाइपोलर डिसऑर्डर में भी लाभदायक सिद्ध होता है।
  • योगा और ध्यान:- योग और ध्यान से दीमक स्थिर होता है और मन शांत होता है और हम अपने आस पास के वातवरण से अवगत हो पते हैं। इसलिए यह बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों में बहुत लाभदायक होता है।
  • नशीले पदार्थों से दूरी:- तम्बाखू के साथ शराब आदि नशीले पदार्थों के सेवन करना बंद कर दे क्योकि यह आपके दीमक और शरीर पर बुरे प्रभाव डालता है और आपके द्वारा ली जाने वाली दवाओं पर भी असर करता है। इसलिए बाइपोलर डिसऑर्डर में नशीले पदार्थं के सेवन से बचना चाहिए।
  • तनाव कम लेना:- तनाव बीपोलेर डिसऑर्डर का मुख्या करक होता है, और यह इस बीमारी को और भी गंभीर बना सकता है इसलिए तनाव लेने से बचे और जिसकेलिए मैडिटेशन और अपने नजदीकी लोगों से मेल मिलाप करें।
  • अच्छी नीद लेना:- नीद का हमारे जीवन में गहरा प्रभाव होता है। अच्छी नीद ना लेने से शारीरिक और मानशिक तनाव बढ़ता है। इसलिए बीपोलेर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति को कम से काम 7 से 8 घंटों की नीद जरूर लेनी चाहिए। लेकिन नीद ना लगाने के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?
  • अच्छा भोजन करना:- एक स्वश्थ और अच्छा भोजन हमारे शरीर के जरूरत के अनुशार नुट्रिएंस प्रदान करते है। जिससे वजह से शरीर का बैलेंस बना रहता है। अधिक तेलीय खाना, फ़ास्ट फ़ूड, आदि से परहेज करना बहुत लाभदायक होगा।
  • एक डायरी लिखना:- बाइपोलर डिसऑर्डर में अपने दैनिक विचरों, भावनाओ, व्यवहारों को जानने और समझने के लिए इनपर नजर रखने की जरूरत होती है ताकि मानसिक बीमारी को समझा जा सके और इलाज आसान हो सके, इसलिए डायरी लिखना इसमें बहुत कारगर साबित हो सकता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर कितने दिन तक रहता है?

बाइपोलर डिसऑर्डर किसी व्यक्ति में कितने दिनों तक रह सकता है, इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। क्योकि यह व्यक्ति पर निर्भर करता है की उसकी मेन्टल कंडीशन कैसी है, उसे किस प्रकार का बाइपोलर है, आदि। लेकिन एक समान्य व्यक्ति में यह 2 साल तक भी रह सकता है और ज्यादा समय भी लग सकता है। मशहूर सिंगर हनी सिंह ने एक इटरव्यू में बताया की उनको बाइपोलर डिसॉर्डर लगभग 5 साल तक रहा।

डिप्रेशन और बाइपोलर में क्या अंतर है?

डिप्रेशन केवल उदासी, निरसा, और हताशा की स्थिति होती है जो व्यक्ति के रोजमर्रा की स्थिति पर निर्भर करती है, और उसी हिसाब से बदलती रहती है, और यह लगभग 10 से 15 दिनों तक रह सकती है। लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर में अत्यधिक उदासी के साथ साथ अत्यधिक उत्साह भी हो सकता है जो 2 साल या इससे अधिक समय तक भी रह सकता है। बाइपोलर 2 डिसऑर्डर के प्रकार में उदासी के लक्षण देखने को मिलते हैं।

क्या बिना दवा के बाइपोलर ठीक हो सकता है?

बाइपोलर डिसऑर्डर बिना दवा के भी ठीक हो सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है की व्यक्ति को किस प्रकार का बाइपोलर है और उसकी स्थिति क्या है। अगर बाइपोलर की स्थिति खराब है तो डॉक्टर के पास जाना भी पड़ सकता है और हॉस्पिटल में भर्ती होने की स्थिति भी हो सकती है।

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