हमारे सेहत पर रॉयल जेली के फायदे और नुकसान | अमृत या जहर

रॉयल जेली मधुमक्खियों द्वारा रानी मधुमक्खी और उनके लार्वा के लिए बनाया गया एक विशेष पदार्थ है जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसका हमारे स्वास्थ्य पर क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं, आइये विस्तार से समझते हैं।

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Anshika Sharma

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मधुमक्खियां अपने जीवन-यापन के लिए कई प्रकार के खाद्य सामग्रियों का निर्माण करती हैं जैसे शहद, मधुमक्खी पराग आदि। उन्हीं में से रॉयल जेली एक है।

“रॉयल जेली” ( Royal jelly ) जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है की यह एक राजसी खाद्य सामग्री है। यह एक सफेद-पीला, चिपचिपा, लेसेदार, जिलेटिनस (gelatinous) पदार्थ होता है। जिसका निर्माण श्रमिक मधुमक्खियों द्वारा विशेष रूप से रानी मधुमक्खी और लार्वा के लिए एक पोषण युक्त भोजन के रूप में किया जाता हैं। रॉयल जेली मधुमक्खी के हाइपोफरीनक्स और जबड़े की लार ग्रंथियों से स्रावित होता है।

क्योंकि रानी मधुमक्खी को लार्वा अवस्था से ही रॉयल जेली का सेवन कराया जाता है इसलिए श्रमिक मधुमखियां जो की 21 दिनों में विकसित होती हैं उनकी तुलना में वे लगभग 15 दिनों ही विकसित हो जाती है। इसके अतिरिक्त रानी मधुमक्खी की उम्र भी बाकियों से अधिक होती है। इसलिए ऐसा माना जाता है की रॉयल जेली मनुष्यों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या रॉयल जेली के सेवन से हमारे स्वास्थ्य पर भी कोई स्कारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसलिए आइए इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं और पता लगाते हैं की हमारे स्वास्थ्य पर रॉयल जेली के फायदे और नुकसान संबंधी प्रभाव क्या हो सकते हैं।

हमारे स्वास्थ्य पर रॉयल जेली के फायदे – Royal Jelly Ke Fayde

रॉयल जेली का उपयोग विभिन्न शारीरिक समस्याओं को दूर करने और पोषण संबंधी विकारों से लड़ने के लिए लंबे समय से होता आया है। क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की विस्तृत श्रंखला पाई जाती है। चलिए पोषक तत्वों सहित रॉयल जेली के फायदों के बारे में विस्तार से समझते हैं।

रॉयल जेली में मौजूद पोषक तत्व

रॉयल जेली में आवश्यक पोषक तत्व और बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं जो विभिन्न स्वास्थ्य लाभों में योगदान प्रदान कर सकते हैं। ताजे प्राप्त रॉयल जेली का मुख्य घटक पानी, चीनी, प्रोटीन और वासा होता है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।

पानी: 50-70%

प्रोटीन: 9-18%

कार्बोहाइड्रेट: 7-18%

लिपिड: 3-8%

ट्रेस खनिज: 0.8-3%

विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स:-

  • बी1 (थियामिन),
  • बी2 (राइबोफ्लेविन),
  • बी3 (नियासिन),
  • बी5 (पैंटोथेनिक एसिड),
  •  बी6 (पाइरिडोक्सिन),
  •  बी7 (बायोटिन)
  • बी9 (फोलेट)

इसके अतिरिक्त इसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड, एंजाइम और कई प्रकार के बायोएक्टिव यौगिक भी पाए जाते हैं।

यह भी पढ़े:- मधुमक्खी पराग के 10 फायदे और कुछ नुकसान

मधुमेह में रॉयल जेली का उपयोग

रॉयल जेली पर हुए कुछ शोध इस ओर संकेत करते हैं की टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के लिए यह फायदेमंद हो सकता है, यह उनके रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में उपयोगी हो सकता है।

रॉयल जेली में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण मुक्त कणों के द्वारा उत्त्पन ऑक्सीडेटिव तनाव को कम कर सकते हैं, जिससे इन्सुलिन को नियंत्रित रखने में मदत मिल सकती है और कोशिकाओं के द्वारा ग्लूकोज अवशोषण बेहतर हो सकता है, जिससे रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदत मिल सकते है।12

संभवतः मधुमेह में रॉयल जेली का उपयोग से सम्बन्धित कुछ शोध सकारात्मक नजरिया रखते हैं लेकिन बेहतर नतीजों के लिए अभी विस्तृत शॉध होना अनिवार्य है।

कोलेस्ट्रॉल और ह्रदय जोखिमों में फायदेमंद

रॉयल जेली के सेवन करना कोलेस्ट्रॉल की समस्या में फायदेमंद हो सकता है। ख़राब कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है।

मनुष्यों और जानवरों पर हुए अध्यनों के मेटा-विश्लेषण से यह पता चलता है की  शाही जेली ने जानवरों के रक्त सीरम और लिवर में कुल लिपिड और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर दिया। इसके अलावां धमनी में एथेरोमा (धमनियों में जमा होने वाली वसा) के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया। मानव परीक्षणों के मेटा-विश्लेषण से यह पता चलता है कि रॉयल जेली ने उनमें भी रक्त सीरम लिपिड और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काफी कम कर दिया और “अच्छे” कोलेस्ट्रॉल (HDL) और “खराब” कोलेस्ट्रॉल (LDL) के अनुपात को भी सामान्य किया।3

कोलेस्ट्रॉल जो की ह्रदय रोगों को बढ़ने में एक जिम्मेदार कारक की भूमिका निभाता है इसको नियंत्रित करने से हृदय जोखिमों को कम किया जाता सकता है। इसलिए रॉयल जेली हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।4

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदतगार

हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में रॉयल जेली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है इसके इसमें पाए जाने वाले खनिज, विटामिन और औषधीय गुण जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण हो सकते हैं। जिसके कारण बैक्टीरिया और वायरस से होने वाले संक्रमण के रोकथाम में मदत मिल सकती है।

घाव भरने और त्वचा के स्वास्थ्य में फ़ायदेमदं

रॉयल जेली में ट्यूमररोधी, जीवाणुरोधी और घाव भरने वाली गतिविधियां पाई जाती हैं, इसलिए यह सम्बवतः त्वचा के स्वास्थ्य को बनाये रखने और घाव को तेजी से भरने में मदत कर सकता है।5

चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया की रॉयल जेली का सेवन करने से उनके त्वचा में कोलेजन उत्पादन बढ़ गया है। कोलेजन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है जो त्वचा को लचीला और युवा बनाए रखता है। इसलिए शोधकर्ता यह अनुमान लगते हैं की रॉयल जेली त्वचा की उम्र बढ़ने से बचाव कर सकता है खासकर हार्मोनल बदलाव के कारण त्वचा की उम्र बढ़ने में।6

इसके अतिरिक्त एक अन्य शोध के अनुसार रॉयल जेली कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाकर सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की क्षति को कम कर सकता है। जिससे त्वचा को लचीला और युवा बनाए रखने में मदत मिल सकती है।7

रॉयल जेली का कैंसर में भूमिका

अध्ययनों से पता चलता है कि रॉयल जेली कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकता है और कैंसर के उपचार के दुष्प्रभावों को कम कर सकता है।8

कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के दौरान  सिर और गर्दन के कैंसर के मरीजों में मुंह के छालों का एक आम दुष्प्रभाव है। रॉयल जेली लेने से मुंह के छालों की समस्या कम हो सकती है।9

हालाँकि कैंसर के उपचार में रॉयल जेली की भूमिका पर निश्चित निष्कर्ष के लिए अभी विस्तृत शोध होना बाकी है।

पुरुष प्रजनन क्षमता पर लाभकारी

अध्ययनों से पता चलता है कि रॉयल जेली शुक्राणु की गुणवत्ता, और संख्या को बढ़ा सकता है जिससे कारण गर्भधारण करने की दर भी बढ़ सकती है।10

चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया की अंडकोष में अधिक गर्मी के तनाव के कारण शुक्राणु की गतिशीलता, जीवित रहने की क्षमता और निषेचन क्षमता कम हो जाती है। रॉयल जेली गर्मी के तनाव के कारण होने वाली नपुंसकता को कम करने में मदद कर सकती है।11

चूहों पर हुए एक अन्य शोध में पाया गया की रॉयल जेली कैडमियम के द्वारा हानिकारक प्रभावों को कम कर सकती है और अंडकोष और शुक्राणुओं की गुणवत्ता को सुरक्षित रख सकती है। कैडमियम एक भरी धातु है जो कई स्वास्थ्य समस्याओं के साथ अंडकोष को भी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या प्रभावित होती है।12

रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में प्रभावी

रॉयल जेली रजोनिवृत्ति (menopause) से जुड़े लक्षणों को कम करने में प्रभावी हो सकता है।रजोनिवृत्ति एक प्रक्रिया है जो महिलाओं में मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद होने का प्रतीक है।

200 पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं (45-60 वर्ष) को आठ सप्ताह तक प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम रॉयल जेली कैप्सूल या प्लेसिबो दिया गया, जिससे उनके रजोनिवृत्ति के लक्षणों में कमी देखी गई।13

एक अन्य अध्ययन जिसमें 40 महिलाओं को प्रतिदिन 800 मिलीग्राम रॉयल जेली 4 सप्ताह तक दिया गया, परिणाम स्वरूप उनमें चिंता, पीठ दर्द और कमर दर्द जैसे रजोनिवृत्ति के लक्षणों में कमी आई।14

रॉयल जेली के नुकसान और सावधानियां

अधिकांश लोगों में रॉयल जेली के उपयोग से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिलता है। लेकिन कुछ लोगों को रॉयल जेली के नुकसान देखने को मिल सकते हैं।

रॉयल जेली के उपयोग करने पर कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है जिसके कारण खुजली, चक्कते, त्वचा पर लालिमा, साँस लेने में कठिनाई, खांसी  आदि हो सकती है।

कुछ लोगों में पेट सम्बन्धी दिक्क्तें हो सकती है जैसे दस्त, पेट में दर्द आदि।

कुछ परिस्थितिओं में रॉयल जेली के प्रयोग में सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। अधिकतर मामलों में यह दवाओं के साथ प्रतिक्रिया कर सकती है जो शारीरिक समस्याओं को उजागर  कर सकती है।

रक्त को पतला करने वाली दवाओं के साथ रॉयल जेली सेवन करने से रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।

हार्मोन थेरेपी से सम्बन्धित दवाओं के साथ इसके प्रयोग में सावधानी बरतनी चाहिए।

ब्लड प्रेशर और मधुमेह को नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ इसके प्रयोग में सावधानी बरतें और डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

निष्कर्ष

रॉयल जेली या शाही जेली वर्कर मधुमक्खियों के द्वारा रानी मधुमक्खी और लार्वा के पोषण के लिए बनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की क्योकि रानी मधुमक्खी इसका सेवन करते है इसलिए अन्य मधुमक्खियों की तुलना में अधिक बड़ी और अधिक दिनों तक जिन्दा रहती है।

रॉयल जेली के फायदों से सम्बन्धित कई अध्यनों में यह पाया गया है की यह इम्यून को बढ़ने में, हृदय स्वास्थ्य, मधुमेह, पुरुष प्रजनन क्षमता, घाव भरने और त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालाँकि मनुष्यों पर इसके फायदों को लेकर विस्तृत शोधों की जरूरत है।  

अधिकतर लोगों में रॉयल जेली के नुकसान नहीं देखने को मिलते हैं लेकिन दुष्प्रभाव से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके सेवन से एलर्जी हो सकती है और पेट सम्बन्धी दिक्क्तें भी देखी जा सकती है। रॉयल जेली अन्य दवाओं के साथ प्रतिकिरिया कर सकती है इसलिए किसी अन्य दवा के साथ इसका उपयोग करने में सावधानी बरतें।

संदर्भ

  1. Shidfar, Farzad et al. “Does Supplementation with Royal Jelly Improve Oxidative Stress and Insulin Resistance in Type 2 Diabetic Patients?.Iranian journal of public health vol. 44,6 (2015): 797-803. ↩︎
  2. Morita, Hiroyuki et al. “Effect of royal jelly ingestion for six months on healthy volunteers.Nutrition journal vol. 11 77. 21 Sep. 2012, doi:10.1186/1475-2891-11-77 ↩︎
  3. Vittek, J. “Effect of royal jelly on serum lipids in experimental animals and humans with atherosclerosis.Experientia vol. 51,9-10 (1995): 927-35. doi:10.1007/BF01921742 ↩︎
  4. Olas, Beata. “Bee Products as Interesting Natural Agents for the Prevention and Treatment of Common Cardiovascular Diseases.Nutrients vol. 14,11 2267. 28 May. 2022, doi:10.3390/nu14112267 ↩︎
  5. Okumura, Nobuaki et al. “Royal Jelly Protects against Epidermal Stress through Upregulation of the NQO1 Expression.International journal of molecular sciences vol. 22,23 12973. 30 Nov. 2021, doi:10.3390/ijms222312973 ↩︎
  6. Park, Hye Min et al. “Royal jelly increases collagen production in rat skin after ovariectomy.Journal of medicinal food vol. 15,6 (2012): 568-75. doi:10.1089/jmf.2011.1888 ↩︎
  7. Park, Hye Min et al. “Royal jelly protects against ultraviolet B-induced photoaging in human skin fibroblasts via enhancing collagen production.Journal of medicinal food vol. 14,9 (2011): 899-906. doi:10.1089/jmf.2010.1363 ↩︎
  8. Miyata, Yasuyoshi, and Hideki Sakai. “Anti-Cancer and Protective Effects of Royal Jelly for Therapy-Induced Toxicities in Malignancies.International journal of molecular sciences vol. 19,10 3270. 21 Oct. 2018, doi:10.3390/ijms19103270 ↩︎
  9. Yamauchi, Kohichi et al. “The effect of topical application of royal jelly on chemoradiotherapy-induced mucositis in head and neck cancer: a preliminary study.International journal of otolaryngology vol. 2014 (2014): 974967. doi:10.1155/2014/974967 ↩︎
  10. Abdelnour, Sameh A et al. “Useful impacts of royal jelly on reproductive sides, fertility rate and sperm traits of animals.Journal of animal physiology and animal nutrition vol. 104,6 (2020): 1798-1808. doi:10.1111/jpn.13303 ↩︎
  11. Mahdivand, Noushin et al. “Royal jelly protects male rats from heat stress-induced reproductive failure.Andrologia vol. 51,3 (2019): e13213. doi:10.1111/and.13213 ↩︎
  12. Ahmed, Mohamed M et al. “Protective potential of royal jelly against cadmium-induced infertility in male rats.Andrologia vol. 50,5 (2018): e12996. doi:10.1111/and.12996 ↩︎
  13. Sharif, Seyedeh Nazanin, and Fatemeh Darsareh. “Effect of royal jelly on menopausal symptoms: A randomized placebo-controlled clinical trial.Complementary therapies in clinical practice vol. 37 (2019): 47-50. doi:10.1016/j.ctcp.2019.08.006 ↩︎
  14. Asama, Takashi et al. “Royal Jelly Supplementation Improves Menopausal Symptoms Such as Backache, Low Back Pain, and Anxiety in Postmenopausal Japanese Women.Evidence-based complementary and alternative medicine : eCAM vol. 2018 4868412. 29 Apr. 2018, doi:10.1155/2018/4868412 ↩︎

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