एक अद्भुत फल खुबानी के फायदे और कुछ संभावित नुकसान

खुबानी में पोषक तत्वों की प्रचुरता पाई जाती है जिसके कारण हमारे सेहत पर इसके अनेको फायदे हो सकते हैं - तो चलिए खुबानी के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से समझते हैं।

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Anshika Sharma

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खुबानी की पहचान

खुबानी (Apricot) अपने मीठे स्वाद के अलावां विटामिन और खनिजों की विस्तारित श्रंखला को लेकर विश्व भर में प्रशिद्ध है। क्योकि इसमें पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है इसलिए सेहत सम्बन्धी खुबानी के फायदे भी कई देखे जा सकते हैं।

यह छोटा सा फल, वनस्पत्ति में आड़ू, नेक्टराइन, प्लम और चेरी का रिश्तेदार है यानी यह सभी फल एक परिवार “प्रूनस” परिवार से सम्बन्धित हैं। इसलिए खुबानी का वैज्ञानिक नाम प्रूनस आर्मेनियाका (Prunus armeniaca) है। जिसे इंग्लिस भाषा में एप्रीकॉट (Apricot) के नाम से जाना जाता है।

खुबानी का फल पीले-नारंगी रंग का होता है जिसके बिच में एक बड़ा सा बीज होता है। खुबानी के फल का छिलका नरम और मखमली होता है और पकने के बाद इसका गूदा और भी नरम और कुछ हद तक रसदार हो जाता है।

हालाँकि खुबानी एक ठंडी जगह का फल लेकिन अधिक ठंड और अधिक गर्म इलाकों में यह फल-फूल नहीं पता है। इसके बेहतर विकास के लिए सबसे उचित तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस होता है इसलिए भारत में यह उत्तराखंड और हिमाचल में अधिक पाया जाता है।

खुबानी के फायदे

खुबानी के फायदे इसमें पाए जाने वाले अनेकों पोषक तत्वों पर निर्भर करते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को बेहतर बनाये रखने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विटामिन और खनिज से भरपूर

खुबानी में पाए जाने वाले पोषक तत्व1

कार्बोहाइड्रेट:- खुबानी में लगभग 11-13% कार्बोहाइड्रेट होते है, और 100 ग्राम खुबानी में लगभग 50 kcals कैलोरी ऊर्जा हो सकती है।

फाइबर:- खुबानी आहार फाइबर का एक अच्छा स्रोत है, 100 ग्राम खुबानी में लगभग 1.5 – 2.4 ग्राम आहार फाइबर  तक होता है।

खनिज:-  खुबानी में पोटेशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और सेलेनियम जैसे आवश्यक खनिज होते हैं।

विटामिन:- खुबानी प्रो-विटामिन ए, सी, के, ई, थायमिन (बी1), राइबोफ्लेविन (बी2), नियासिन (बी3), पाइरिडोक्सिन (बी6), फोलिक एसिड (बी9) से भरपूर है।

कार्बनिक अम्ल:- खुबानी में मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड जैसे कार्बनिक अम्ल होते हैं। इसके अतिरिक्त टार्टरिक, स्यूसिनिक, ऑक्सालिक और अन्य जैसे अन्य अम्ल भी मौजूद होते हैं।

प्रोटीन और वसा:- हालाँकि खुबानी के गूदे में कम मात्रा में प्रोटीन और वसा होती है, लेकिन इसके गिरी (बीज) में प्रोटीन और वासा की अधिक मात्रा पाई जाती है। इसके बीज में लगभग 20-30% प्रोटीन और 40-52% वसा पाई जाती है।

त्वचा के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है

त्वचा के क्षतिग्रस्त होने के कई कारक हो सकते हैं जैसे पर्यावरण प्रदूषण, सूरज प्रकाश, उम्र और त्वचा के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की कमी आदि। इन कारकों के कारण त्वचा पर दाग धब्बे, झुर्रियां आने लगती हैं, और त्वचा नीरस दिखने लगती है।

खुबानी में मौजूद पोषक तत्व, विटामिन सी और ई के साथ कई प्रकार के एंटीऑक्सिडेंट गुण त्वचा सम्बन्धी विकारों से लड़ने में मदतगार साबित हो सकते हैं। विटामिन सी मुक्त कणों के प्रभाव को कम करके पर्यावरण प्रदूषकों और uv किरणों से त्वचा का बचाव करने के कारगर है।23

इसके अतिरिक्त खुबानी में फाइटोइन और फाइटोफ्लुइन सहित विभिन्न प्रकार के कैरोटीनॉयड पाए जाते हैं जो यूवी प्रकाश, प्रदूषण और धूम्रपान जैसे पर्यावरणीय तत्वों के कारण त्वचा पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं।

आँखों के लिए फायदेमंद हो सकता है

खुबानी में कैरोटीनॉयड पाए जाते हैं जैसे ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।4 कैरोटीनॉयड एक प्रकार का रो-विटामिन ए होता है जिन्हें हमारा शरीर पचा कर विटामिन ए में परिवर्तित करता है। जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

इसके अतिरक्त खुबानी पूर्ण विटामिन ए और ई का भी एक बहुत ही अच्छा स्रोत है विटामिन ए रतौंधी जैसी समस्या को दूर रखता है जबकि विटामिन ई अन्य प्रकार के मुक्त कणो से होने वाले नुकसान से आखों को बचता है।5

आंत के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है

खुबानी में उच्य मात्रा में फाइबर और सोर्बिटोल पाए जाते हैं जो आंत में पाए जाने वाले माइक्रोबायोटा पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, माइक्रोबायोटा मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बैक्टीरिया का समूह है। इसलिए खुबानी आंत के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें पाए जाने वाले फाइबर पाचन को बेहतर कर सकता है जिससे पेट सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं को होने से रोका जा सकता है।6

रक्तचाप को संतुलित कर सकता है

खुबानी में पोटेशियम जैसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो एक प्रकार के इलेक्ट्रोलाइट के रूप में कार्य करते हैं, जिससे तंत्रिकाएं, मांसपेशियां और हृदय के स्वास्थ्य को बनाये रखने में मदत मिलती है। 

क्योकि पोटेशियम मांसपेशियों के संकुचन को कम करता है, सूजन को कम करता है, और द्रव संतुलन को विनियमित करता है, जिससे समान्य रक्तचाप को बनाये रखने में मदत मिलती है7 जिसके परिणामस्वरूप स्ट्रोक होने का खतरा भी कम हो जाता है।

लिवर के फायदेमंद हो सकता है

खुबानी में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो विषक्त पदर्थों जैसे शराब आदि से लिवर में होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदत कर सकते हैं जिससे लिवर की क्षति को रोकने में मदद मिल सकती है, और लिवर के कार्य छमता में भी सुधार हो सकता है।8

चूहों पर हुए शोध में खुबानी का लिवर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं लेकिन मनुष्यों पर इसके क्या प्रभाव हो सकते हैं इसपर अभी विस्तृत शोध होना बाकि है।9

खुबानी ह्रदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है

खुबानी में पाए जाने वाले खनिज, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और एन्टीइन्फ्लमेट्री गुण हृदय स्वास्थ्य को बढ़ने में फायदेमंद हो सकते हैं। इसमें पाए जाने वाले घुलनशील फाइबर और पोटेशियम का ह्रदय स्वास्थ्य को बढ़ने में विशेष योगदान हो सकता है क्योकि घुलनशील फाइबर ‘खराब’ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है और पोटेशियम रक्त चाप को नियंत्रित कर सकता है, जिन्हें हृदय रोगों के लिए जोखिम कारक माना जाता है।10

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संभावित खुबानी के नुकसान

खुबानी के फायदे कई और दिलचस्प हो सकते हैं लेकिन इसके अव्यवस्थित सेवन करने से कुछ नुकसान भी देखे जा सकते हैं, इसलिए यह बहुत जरूरी हो जाता है की किसी अच्छे खाद्य विशेषज्ञ की परामर्श से ही इसका सेवन किया जाये।

खुबानी के नुकसान:-

कुछ व्यक्तिओं में खुबानी से एलर्जी के लक्षण देखे जा सकते हैं जैसे त्वचा पर लालिमा, चक्क्ते, खुजली, जलन आदि। इसके प्रयोग के बाद ऐसे लक्षण उत्तपन होने पर इसके उपयोग पर तुरंत रोक लगा देनी चाहिए।

कई जगहों पर ऐसा उल्लेख किया गया है की खुबानी के बीज जो की इसकी गुठली के अंदर एक छोटे बादाम की तरह होता है, में हल्की मात्रा में हैड्रोसायनिक ऐसिड नाम का ज़हरीला पदार्थ होता है, जिसके अधिक सेवन से कई दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं। इसलिए इसका प्रयोग करेने से पहले डॉक्टर की परामर्श अनिवार्य है।

खुबानी के अधिक प्रयोग से पेट सम्बन्धी विभिन्न समस्याएं उत्त्पन हो सकती हैं जैसे दस्त, पेट दर्द, मरोड़ आदि।

खुबानी के इस्तेमल से सावधानियां किन्हें बरतनी चाहिए

गर्भवती और स्तनपान करने वाली महिलाओं को किसी भी नए खाद्य पदार्थ को अपने आहार से शामिल करने में सावधानी बरतनी चाहिए,  इसलिए खुबानी के अधिक सेवन में वे सतर्क रहें। और अगर यह फल आपके लिए नया है तो इसके प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

दमा और डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तिओं को खुबानी के सेवन करने में सतर्क रहने की जरूरत है उनके लिए बेहतर होगा की इसका प्रयोग नहीं किया जाये।

छोटे बच्चों को भी इसके अधिक इस्तेमाल करने में सावधानी बरतनी चाहिए क्योकि उनमें इसके दुष्प्रभाव आसानी से उत्त्पन हो सकते हैं।

निष्कर्ष

खुबानी (Apricot) जिसका वज्ञानिक नाम प्रूनस आर्मेनियाका है एक बहुत ही मीठा फल है। यह पिले – नारंगी रंग का होता है जिसका छिलका नरम और मखमली होता है और पकने के बाद इसका गूदा और भी नरम और कुछ हद तक रसदार हो जाता है।

हमारे सेहत पर खुबानी के फायदे अनेक देखे जा सकते हैं जैसे त्वचा के स्वास्थ्य में फायदेमंद, आखों के लिए लाभदायक, आंत के स्वस्थ बेहतर करने में सक्षम, और लिवर-ह्रदय के लिए भी फायदेमंद आदि। क्योकि खुबानी में कई प्रकार के पोषक तत्व, खनिज, और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं।

खुबानी के इन फायदों के अतिरिक्त इसके कुछ नुकसान भी हो सकतें हैं जैसे एलर्जी, पेट संबंधी दिक्क्तें आदि। इसलिए गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को इसके प्रयोग करने में बहुत सावधानी बरतने की जरूर होती है। हमारी सलाह यह रहेगी की अगर यह फल आपके लिए नया है तो इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

संदर्भ

  1. Fatima, Tabasum, et al. “Nutritional and health benefits of apricots.International Journal of Unani and Integrative Medicine 2.2 (2018): 5-9. ↩︎
  2. Pullar, Juliet M., Anitra C. Carr, and Margreet Vissers. “The roles of vitamin C in skin health.Nutrients 9.8 (2017): 866. ↩︎
  3. Meléndez-Martínez, Antonio J., Carla M. Stinco, and Paula Mapelli-Brahm. “Skin carotenoids in public health and nutricosmetics: The emerging roles and applications of the UV radiation-absorbing colourless carotenoids phytoene and phytofluene.Nutrients 11.5 (2019): 1093. ↩︎
  4. Alajil, Omar, et al. “Nutritional and phytochemical traits of apricots (Prunus armeniaca L.) for application in nutraceutical and health industry.Foods 10.6 (2021): 1344. ↩︎
  5. Clifford, Luke J., Andrew MJ Turnbull, and Anne M. Denning. “Reversible night blindness–A reminder of the increasing importance of vitamin A deficiency in the developed world.Journal of Optometry 6.3 (2013): 173-174. ↩︎
  6. Vardi, Nigar, et al. “Potent protective effect of apricot and β-carotene on methotrexate-induced intestinal oxidative damage in rats.Food and chemical toxicology 46.9 (2008): 3015-3022. ↩︎
  7. Kopčeková, Jana, et al. “Influence of long-term consumption of bitter apricot seeds on risk factors for cardiovascular diseases.Journal of Environmental Science and Health, Part B 53.5 (2018): 298-303. ↩︎
  8. Ramadan, Amer, et al. “The pharmacological effect of apricot seeds extracts and amygdalin in experimentally induced liver damage and hepatocellular carcinoma.Journal of Herbmed Pharmacology 9.4 (2020): 400-407. ↩︎
  9. Yilmaz, İ. S. M. E. T., et al. “Effects of organic apricot on liver regeneration after partial hepatectomy in rats.Transplantation Proceedings. Vol. 45. No. 6. Elsevier, 2013. ↩︎
  10. Al-Soufi, Maryam Haroon, et al. “A review with updated perspectives on nutritional and therapeutic benefits of apricot and the industrial application of its underutilized parts.Molecules 27.15 (2022): 5016. ↩︎

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