छोटी हरड़ के फायदे और नुकसान: गुण और संक्षिप्त परिचय

छोटी हरड़ के फायदे अनेक हैं क्योकि इसमें में रेचक, विरेचक, एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी, मुक्त कण रोधी आदि गुण पाए जाते हैं, हालाँकि इसके सेवन में सावधानियां भी बरतने की जरूरत है। चलिए विस्तार से जानते हैं।

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Brijesh Yadav

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हरड़, प्रकृति द्वारा प्रदान की गई एक दिव्य औषधि है इसमें मौजूद अनेको औषधीय गुणों के कारण यह कई प्रकार के शारीरिक लाभों को प्रदान करने वाली औषधि के रूप से पहचानी जाती है। इसे आम बोलचाल की भाषा में हरीतकी के नाम से भी जाना जाता है।  

संभवतः छोटी हरड़ के फायदे को लेकर आप पूरी तरह से अनजान नहीं होंगे लेकिन इसके पूर्ण परिचय, फायदे, नुकसान और उपयोग का सम्पूर्ण ज्ञान होना भी थोड़ा मुश्किल लगता है।

इसलिए चलिए इस ब्लॉग पोस्ट में माध्यम से छोटी हरड़ के फायदे और नुकसान से लेकर इसके परिचय, और उपयोग के बारे में विस्तार पूर्वक से समझते हैं ताकि इसका उचित उपयोग कर हम पूर्ण स्वास्थ लाभ उठा सकें।

छोटी हरड़ का संछिप्त परिचय

हरड़, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “Terminalia chebula” के नाम से जाना जाता है, और आम बोलचाल के भषा में हरीतकी और हर्रे भी कहा जाता है। इसका उल्लेख उपनिषदों से लेकर आयुर्वेद में विभिन्न दोषों को दूर करने वाले औषधि के रूप में किया गया है।

विकिपीडिआ में वर्णित राज बल्लभ निघण्टु के अनुसार

यस्य माता गृहे नास्ति, तस्य माता हरीतकी।

कदाचिद् कुप्यते माता, नोदरस्था हरीतकी ॥

(अर्थात् हरीतकी मनुष्यों की माता के समान हित करने वाली है। माता तो कभी-कभी कुपित भी हो जाती है, परन्तु उदर स्थिति अर्थात् खायी हुई हरड़ कभी भी अपकारी नहीं होती। )

मुख्यतः छोटी हरड़ भारत, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन, और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाया जाता है।

आयुर्वेद में वर्णित इसके गुणों में यह तीक्ष्ण और कड़वा प्रकृति का होता है जो शीतलता प्रदान करता है और वृष्य और पाचन में बहुत असरदार व प्रमुख है। छोटी हरड़ का उपयोग पाचन और आमाशय की शुद्धि के लिए किया जाता है, साथ ही यह त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी होता है।

“त्रिफला” एक शक्तिशाली चूर्ण है जो तीन औषधियों को मिला कर बनाई जाती है, इसमें मिलाए जाने वली तीनों औषधियों में से एक छोटी हरड़ होती है।

छोटी हरड़ के फायदे

गुणों को देखते हुए छोटी हरड़ के फायदों का आकलन लगाना आसान हो जाता है।  इसमें रेचक, विरेचक, एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी, विषहरण, मुक्त कण रोधी आदि गुण पाए जाते हैं1 इसलिए यह हमें विभिन्न शारीरिक समस्याओं और रोगों से निजाद दिलाने में कारगर शाबित हो सकता है। जिनका जिक्र निम्नलिखित किया गया है:- 

छोटी हरड़ के फायदे

शारीरिक ताकत को बढ़ावा देने में मदद:- छोटी हरड़ में पाये जाने वाले गुण, जैसे कि लघुत्व, शीतलता, और वृष्यता, शारीरिक ताकत को बढ़ावा देने में मदद कर सकतें हैं। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करके थकान को कम कर सकता है और ताकत को बढ़ावा दे सकता है।2

पाचन प्रणाली को सुधारने में मदद:- छोटी हरड़ के फायदों में से एक पाचन संबंधित समस्याओं से निदान पाना है, क्योकि यह भोजन को अच्छी तरह से पचाने में मदद कर सकता है। यह अपच और गैस्ट्रिक समस्याओं को कम करने में भी सहायक हो सकता है, जिससे आपका पाचन प्रणाली स्वस्थ रहता है।

बवासीर में फायदेमंद:- छोटी हरड़ बवासीर की दिक्कत से छुटकारा दिला सकती है। कहीं न कहीं बवासीर का संबंध खराब पाचन क्रिया से होता है। हरड़ के लेक्सेटिव गुण के कारण मल पतला और मुलायम हो जाता है जिस वजह से इसे त्यागने में अधिक दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। इसलिए हरड़ बवासीर की दिक्कत से राहत दिलाने में मदत कर सकता है।3

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक:- छोटी हरड़ का सेवन रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद गुण, जैसे कि शीतलता, रक्तदाब को कम करने में मदद करते हैं, जो उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद:- छोटी हरड़ त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके पाचन गुण त्वचा को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। यह त्वचा की कोमलता को बनाए रखने में मदद कर सकता है और विभिन्न त्वचा समस्याओं, जैसे कि चर्म रोग और दाग-धब्बों को कम करने में भी सहायक हो सकता है।4

हाइपरयूरिसीमिया से राहत:- यह स्थित तब होती है जब किडनी के सही से काम नहीं करने पर शरीर में युरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है, जिसके कारण जोड़ों का दर्द, जोड़ों के आसपास सूजन व लालिमा, गले में खरास और कुछ स्थिति में किडनी स्टोन आदि देखने को मिल सकता है। एक शोध में यह पाया गया की हरड़ के सेवन करने से सीरम यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है, जिस कारण से हाइपरयूरिसीमिया से राहत मिल सकती है।5

मस्तिष्क के लिए सुधारक:- छोटी हरड़ के सेदेटिव गुण मस्तिष्क के लिए फायदेमंद होते हैं। यह शांति, ध्यान, और सुख की अवस्था में मदद कर सकते हैं। इसका सेवन तंत्रिका तंत्र को साकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और मानसिक स्थिति को सुधारने में मदद कर सकता है।

दर्द और सूजन कम करने में मदद:- छोटी हरड़ के एंटी-इन्फ्लैमेटरी गुण दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, विशेष रूप से जोड़ों के दर्द और सूजन के मामले में। इसका नियमित सेवन करने से जॉइंट पेन की समस्याओं को सुधारने में मदद मिल सकती है।

बालों की सेहत के लिए उपयोगी:- छोटी हरड़ का बालों की सेहत के लिए एक प्राकृतिक औषधि के रूप में उपयोगी हो सकता है। यह बालों को ताकतवर और स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है। इसके आयुर्वेदिक गुण बालों को मूल से पोषण पहुंचाने, मजबूत करने और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है।6

पेप्टिक अल्सर से राहत:- यह एक एसी स्थिति होती है जिसमे छोटी आंत के पतली परत में घाव या अल्सर हो जाता है जिसके कारण छाती और नाभि के बीच दर्द, जलन, थकान, खून की उल्टी आदि लक्षण देखने को मिल सकते हैं। शोध में यह पाया गया की हरितकी के सेवन से अल्सर की समस्या में राहत मिल सकती है।7

छोटी हरड़ के नुकसान

हालांकि औषधीय गुणों के कारण छोटी हरड़ के फायदे कई देखने को मिलते हैं लेकिन छोटी हरड़ के नुकसान के संभावनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कुछ लोगों में इसके सेवन करने पर सेहत से जुड़े कुछ साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं जिनका जिक्र निम्नलिखित किया गया है:-

एलर्जी:- कुछ लोगों में छोटी हरड़ के सेवन से एलर्जी की समस्या देखने को मिल सकती हैं जिसके कारण त्वचा पर चकत्ते, खुजली, लालिमा आदि देखने को मिल सकती है। एसी स्थिति में इसका प्रयोग ना करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

पेट संबंधी परेशानियां:- हालांकि हरितकी (छोटी हरड़) का सेवन पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ लोगों में या इसके अधिक सेवन के कारण पेट संबंधी समस्याएं उजागर हो सकती हैं जिसमे पेट झड़ना, एसिडिटी आदि सामिल हैं। ऐसा इसके टेक्सेटिव गुण के कारण होता है जो मल को पतला बना देता है।

उल्टी व मतली:- कुछ लोगों में हरड़ के सेवन के बाद उल्टी व मतली की समस्या हो सकती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसका स्वाद बहुत ही कसैला और कड़वा होता है।

छोटी हरड़ के नुकसान शरीर पर अन्य भी कई हो सकते हैं यहां केवल महत्वपूर्ण साइड इफेक्ट्स का ही जिक्र किया गया है। इसके सेवन से किसी भी शारीरिक परेशानी की स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

छोटी हरड़ के उपयोग में सावधानियां

छोटी हरड़ के फायदे अनेक हैं लेकिन इसके कुछ संभावित नुकसान भी हो सकते हैं, जिनका जिक्र हमने ऊपर किया है। इसलिए इसके उपयोग से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। छोटी हरड़ के नुकसान व साइड इफेक्ट्स को कम करने के लिए हमें कई प्रकार की सावधानियां अपनाने की जरूरत होती है, चलिए विस्तार से समझते हैं:-

  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करा रही महिलाओं को इसके उपयोग के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। और छोटी हरड़ का उपयोग डॉक्टर के सलाह से ही करना चाहिए।
  • दस्त की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को इसके उपयोग में सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • अगर आप किसी अन्य दवाई का सेवन कर रहें हैं तो छोटी हरड़ के उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
  • अगर आपको छोटी हरड़ के उपयोग पर दस्त, त्वचा पर चकत्ते, लालिमा, खुजली आदि की समस्या महसूस होती है तो इसके प्रयोग पर तुरंत रोक लगा दें।
  • डिहाइड्रेशन से पीड़ित लोगों को हरड़ उपयोग से बचना चाहिए, क्योंकि यह इस स्थिति को बढ़ा सकता है।
  • बच्चों को छोटी हरड़ के उपयोग से बचना चाहिए, और प्रयोग से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

छोटी हरड़ के फायदे और नुकसान को देखते हुए यहां कुछ प्रमुख सावधानियों का ही जिक्र किया गया है। कुछ अन्य प्रस्थितियों में भी इसके प्रति सावधानियों की जरूरत हो सकती है इसलिए छोटी हरड़ के उपयोग से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

निष्कर्ष

हमने छोटी हरड़ के परिचय और ऐतिहासिक महत्त्व को विस्तार पूर्वक जाना। यह एक ऐसी औषधि है जिसके फायदों के बारे में ऐतिहासिक ग्रंथों में भी बड़े पैमाने पर जिक्र किया गया है।

कई शोधों में भी यह पाया गया की छोटी हरड़ के फायदे अनेक हो सकते हैं जैसे पेट संबंधी परेशानियों से छुटकारा, त्वचा की समस्याओं से राहत, उच्य रक्तचाप और बवासीर जैसी बीमारियों से राहत आदि।

हालांकि छोटी हरड़ के नुकसान भी हो सकते हैं जिसमें एलर्जी, दस्त आदि समस्याएं सामिल हैं। इसलिए इसके प्रयोग से पहले कुछ लोगों को बहुत सावधानि को बरतने की जरूरत होती है जिसमें गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

छोटी हरड़ की तासीर क्या है?

आयुर्वेद के अनुसार छोटी हरड़ की तासीर गर्म होती है। इसलिए गर्मी के मौसम में इसके प्रयोग में अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है। अधिक शारीरिक परिश्रम के तुरंत बाद भी इसका उपयोग करने से बचना चाहिए।

छोटी हरड़ कब खाना चाहिए?

छोटी हरड़ का उपयोग सर्दी के मौसम में करना सही हो सकता है, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती  है। रात के समय सोने से पहले इसका उपयोग किया जा सकता है। दोपहर के समय या अधिक शारीरिक परिश्रम के बाद इसके प्रयोग से बचना चाहिए। हालांकि सबकी शारीरिक प्रकृति भिन्न होती है इसलिए छोटी हरड़ के उपयोग से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

संदर्भ

  1. Ram, Thrigulla Saketh, Bandari Srinivasulu, and Ala Narayana. “Pragmatic usage of haritaki (Terminalia chebula Retz): an ayurvedic perspective vis-a-vis current practice.” Int. J. Ayur. Pharma Research 1.3 (2013): 72-82. ↩︎
  2. Sakthi, G., and SR Pholtan Rajeev. “Comparative study on Characterization of dry fruit Terminalia chebula Linn. with seeds and without seeds.” Journal of Research in Biomedical Sciences 3.2 (2020): 62-71. ↩︎
  3. Bag, Anwesa, Subir Kumar Bhattacharyya, and Rabi Ranjan Chattopadhyay. “The development of Terminalia chebula Retz.(Combretaceae) in clinical research.” Asian Pacific journal of tropical biomedicine 3.3 (2013): 244-252. ↩︎
  4. Dudi, Sunita, et al. “THE TREATMENT OF TWAK-VIKAR (SKIN-DISORDERS) BY KUSHTHAGHNA MAHAKASAYA OF CHARAKA SAMHITA.” ↩︎
  5. Usharani, Pingali, et al. “A randomized, double-blind, placebo-, and positive-controlled clinical pilot study to evaluate the efficacy and tolerability of standardized aqueous extracts of Terminalia chebula and Terminalia bellerica in subjects with hyperuricemia.” Clinical pharmacology: advances and applications (2016): 51-59. ↩︎
  6. Cathelin, J. K., T. L. Gopal, and G. S. Sunitha. “Echoes of Synthesis and Understanding of Hair Dye in Ayurveda: A Review.” RGUHS Journal of AYUSH Sciences 8.1 (2021). ↩︎
  7. Priya, F. Hypolipidemic activity of Kadukkai Chooranam (Terminalia chebula) and Anti-Ulcer activity of Milagathy Choornam. Diss. Government Siddha Medical College, Chennai, 2013. ↩︎

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