अतिबला (कंघी): फायदे, नुकसान और उपयोग

अतिबला का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है जिसके हमारे स्वास्थ्य पर कई फायदे देखने को मिल सकते हैं लेकिन कुछ संभावित नुकसान भी हो सकते हैं। चलिए अतिबला के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से समझते हैं।

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Brijesh Yadav

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विभिन्न रोगों में अतिबला के फायदों को प्राप्त करने के लिए इसका उपयोग ऐतिहासिक है। आयुर्वेद जो भारतीय महाद्वीप की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है उसमें भी अतिबला के फायदे, उपयोग और सावधानियों के बारे में जिक्र मिलता है। यह एक औषधीय जड़ी बूटी है जिसके प्रत्येक भाग का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी फायदे पाने के लिए किया जा सकता है।

भारत में तो अतिबला का पौधा आसानी से उपलब्ध हो जाता है क्योकि यह बारहमासी पौधा है और पुरे भारत में पाया जाता है, और यह खेत-खलिहानों, सड़को के किनारे, हमारे घर के आस-पास आसानी से मिल जाता है।

अतिबला की पहचान

अतिबला एक पौधा है जिसको अन्य कई नामों से जाना जाता है जिसमें कंघा व कांघी (हिंदी), अतिबला या कंकटिक और इंग्लिश में इंडियन मैलो (Indian mallow) आदि नामों से जाना जाता है। अतिबला का वैज्ञानिक नाम एबूटिलोन इंडिकम (Abutilon indicum) है, जो पौधे के मालवेसी  (Malvaceae) परिवार से संबंधित है।

अतिबला का पेड़ मूल रूप से भारत का निवासी है लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है।

पौधा:- अतिबला का पौधा आमतौर पर झाड़ी या छोटे पेड़ के रूप में बढ़ता है जिसके ऊंचाई 1 से 3 मीटर की होती है।

पत्तियां:- इसकी पत्तियां सरल, दाँतेदार किनारों के साथ दिल के आकार की होती हैं और स्पर्श करने में मखमली प्रतीत होती हैं।

फूल:- इसका फूल आमतौर पर पांच पंखुड़ियों वाले होते हैं जो पिले रंग के होते हैं।

फल:- इसके फल गोलाकार कंघी के आकर का एक कैप्सूल जैसे प्रतीत होते हैं जिनमें छोटे छोटे बीज होते हैं परिपक्व होने पर कैप्सूल खुल जाता है, जिससे बीज निकल जाते हैं।

अतिबला पौधे के विभिन्न भागों, जैसे पत्तियां, जड़ें और बीज, का उपयोग उनके चिकित्सीय लाभों के लिए किया जाता है, क्योकि इसमें सूजन-रोधी, एनाल्जेसिक और मूत्रवर्धक गुण होते हैं।

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हमारे स्वास्थ्य पर अतिबला के फायदे (Atibala ke fayde)

अतिबला में महत्वपूर्ण औषधीय गुण पाए जातें हैं जो इसे एक स्वास्थवर्धक जड़ीबूटी बना देते हैं। चलिए अतिबला के फायदों पर विस्तारपूर्वक नजर डालें:-

एंटीऑक्सीडेंट गुणों से समृद्ध

अतिबला कई पुरानी बीमारियाँ और हृदय संबंधी विकारों में फायदेमंद हो सकता है क्योकि  इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन रोधी गुण पाए जाते हैं।

अतिबला के पत्तों में फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स, फेनोलिक यौगिक, टैनिन, सैपोनिन, स्टेरॉयड, ग्लाइकोसाइड्स और टेरपेनोइड्स जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं जो इसे एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रदान करते हैं। यह ऑक्सीडेटिव तनाव और मुक्त कणों से होने वाली शारीरिक नुकसान से बचाता है।1

मधुमेह विरोधी गतिविधियाँ

अतिबला का उपयोग मधुमेह से लाभकारी हो सकता है। मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें इंसुलिन की कार्यछमता पर असर पहुँचता है, जिससे शुगर के खपत में कमी आती है और रक्त शर्करा बढ़ने लगता है। इस कारण से थकान, घाव धीरे-धीरे ठीक होना, वजन घटना या बढ़ना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। साथ की कई गंभीर बिमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे दिल की बीमारी, गुर्दा रोग आदि।

चूहों पर हुए अध्ययन में पाया गया की अतिबला इंसुलिन की कार्यछमता और उत्तसर्जन को बढ़ा सकता है जिससे शुगर का कोशिकाओं के अंदर जाना और ऊर्जा के लिए उपयोग करना आसान हो सकता है जिससे रक्त शर्करा का स्तर संभावित रूप से कम हो सकता है, और साथ ही शुगर के कार्यान्वयन में भी सुधार हो सकता है।2

हृदय स्वास्थ्य में अतिबला का उपयोग

अतिबला का उपयोग ह्रदय स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए किया जा सकता है।अतिबला में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण मुक्त कणों से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव या कोशिका क्षति को कम कर सकते हैं। जिसके कारण हृदय जोखिमों को कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अतिबला का उपयोग रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है जो हृदय जोखिमों को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक है।

अतिबला के कैंसर रोधी गुण

अतिबला में कैंसर-रोधी गुण पाए जाते हैं यानी इसके पत्तों का सेवन कैंसर कोशिकाओं को उत्त्पन्न करने वाले कारकों को रोक सकता है। इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड्स और कुछ अल्कलॉइड्स मुक्त कणों से होने वाली क्षति को कम कर सकते हैं जो कैंसर संबंधी अन्य गंभीर बिमारियों को रोकने में मदत कर सकते हैं।3

इसके अतिरिक्त इसमें पाए जाने वाले फेनोलिक, टैनिन, और सैपोनिन्स आदि योगिक कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदत कर सकते हैं। हालाँकि अतिबला के कैंसर-रोधी गुण का सटीक और स्पष्ट नतीजों के लिए विस्तृत शोध की जरूरत है।456

लिवर स्वास्थ्य पर अतिबला का उपयोग

अतिबला का उपयोग लिवर सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जा सकता है। अध्ययन इस ओर संकेत करते हैं की अतिबला के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण यकृत विषाक्तता के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव प्रदान कर सकते हैं और सूजन को कम कर सकते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों (जैसे ग्लूटाथियोन पेरोक्सीडेज, सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज और कैटालेज़) के स्तर को बढ़ाकर और लिपिड पेरोक्सीडेशन को कम करके करता है। जो सम्भवतः लिवर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।7

अतिबला के अन्य परम्परिक फायदे और उपयोग

अन्य कई स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे प्राप्त करने के लिए अतिबला का उपयोग निम्नलिखित है।8

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता में विकास कर सकता है।
  • दर्द में रहत प्रदान कर सकता है।
  • घाव को तेजी से ठीक करने में उपयोगी हो सकता है।
  • पेट सम्बन्धी समस्याओं में कारगर हो सकता है।

ध्यान दें:- अतिबला के विभिन्न रोगों या स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना अनिवर्य है।

अतिबला के नुकसान और सावधानियां

औषधीय गुणों के कारण अतिबला के फायदे कई हो सकते हैं। लेकिन इसके उपयोग से कुछ लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं उत्त्पन्न हो सकती हैं हालाँकि इसकी संभावनाएं कम ही होती है। और कुछ लोगों को इसके उपयोग में सावधानि भी बरतने के जरूरत होती है। चलिए अतिबला के नुकसान और सवधानियों को विस्तार से समझते हैं।  

– अधिक सेवन पेट संबंधी विकार जैसे दस्त, मरोड़, जलन उत्तपन्न कर सकता है।

– शुगर स्तर को नियंत्रित करने वाली दवाओं के साथ इसका उपयोग करने से शुगर स्तर तेजी से निचे आ सकता है, जिसके कई दुस्प्र्भाव है।

– किसी स्वास्थ्य समस्या के दौरान या किसी अन्य दवाई के साथ इसका उपयोग समस्याओं को ओर अधिक बढ़ा सकता है।

– गर्भवती महिलाओं को इसके उपयोग में सवधानी बरतनी चाहिए। हलांकि उनपर इसके नुकसान सम्बन्धी साक्ष्य की कमी हैं।

उपर्युक्त अतिबला के नुकसान को देखते हुए हमारी सलाह रहेगी की इसके प्रयोग से पहले किसी अनुभवी आयुर्वेदाचर्य से अवश्य परामर्श करें।

अतिबला पौधे का उपयोग कैसे करें?

अतिबला का इस्तेमाल विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, कुछ निम्नलिखित व्यक्त हैं:-

  • अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर उपयोग किया जा सकता है।
  • अतिबला चूर्ण के फायदे कई हैं इसलिए इसको चूर्ण के रूप इस्तेमाल करना आसान और उपयोगी माध्यम हो सकता है।
  • इसके पत्तों का रस निकल कर पिया जा सकता है।
  • इसके पत्तों का लेप घाव और त्वचा पर किया जा सकता है।

निष्कर्ष

अतिबला औषधीय गुणों से परिपूर्ण एक पौधा है जो पूरे भारत वर्ष में आसानी से खेतों, सड़कों आदि के किनारों पर मिल जाता है। इसको अन्य कई नामों से जाना जाता है जिसमें कंघी, इंडियन मैलो (Indian mallow) नाम प्रमुख है।

अतिबला में फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स जैसे विभिन्न योगिक पाए जाते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण प्रदर्शित करते हैं। अतिबला के फायदों में यह मधुमेह, हृदय स्वास्थ, लिवर स्वास्थ को बेहतर करने में उपयोगी हो सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें कैंसर रोधी गुण भी पाए जाते हैं।

हालाँकि की इसका उपयोग कुछ लोगों के लिए स्वास्थ्य समस्याएं भी उजागर कर सकता है जैसे दस्त, मरोड़, और जलन। वह लोग जो मधुमेह की दवा का सेवन कर रहे है या किसी अन्य दवा के साथ इसका सेवन हानिकारक हो सकता है। इसलिए इसके उपयोग से पहले डॉक्टर से परामर्श कर जरूरी है।

संदर्भ

  1. Sunil, Mannala et al. “Phytochemical Analysis and Antioxidant Evaluation of the Ethanolic Extract of the Leaves of Abutilon indicum.” Cureus vol. 15,10 e47703. 26 Oct. 2023, doi:10.7759/cureus.47703 ↩︎
  2. Krisanapun, Chutwadee et al. “Antidiabetic Activities of Abutilon indicum (L.) Sweet Are Mediated by Enhancement of Adipocyte Differentiation and Activation of the GLUT1 Promoter.” Evidence-based complementary and alternative medicine : eCAM vol. 2011 (2011): 167684. doi:10.1093/ecam/neq004 ↩︎
  3. Kopustinskiene, Dalia M et al. “Flavonoids as Anticancer Agents.Nutrients vol. 12,2 457. 12 Feb. 2020, doi:10.3390/nu12020457 ↩︎
  4. Abotaleb, Mariam et al. “Therapeutic Potential of Plant Phenolic Acids in the Treatment of Cancer.Biomolecules vol. 10,2 221. 3 Feb. 2020, doi:10.3390/biom10020221 ↩︎
  5. Kleszcz, Robert et al. “Tannins in cancer prevention and therapy.British journal of pharmacology, 10.1111/bph.16224. 23 Aug. 2023, doi:10.1111/bph.16224 ↩︎
  6. Elekofehinti, Olusola Olalekan et al. “Saponins in Cancer Treatment: Current Progress and Future Prospects.Pathophysiology : the official journal of the International Society for Pathophysiology vol. 28,2 250-272. 5 Jun. 2021, doi:10.3390/pathophysiology28020017 ↩︎
  7. Kumar, R. Santhosh, et al. “Hepatoprotective Role of Abutilon indicum on Lead Induced Liver Injury in Wistar Rats.↩︎
  8. Patel, Milind Kashinath, and Ambarsing Pratapsingh Rajput. “Therapeutic significance of Abutilon indicum: An overview.Am. J. Pharm. Tech. Res 4 (2013): 20-35. ↩︎

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