हरसिंगार (पारिजात) के फायदे और नुकसान की सम्पूर्ण जानकारी

हरसिंगार (पारिजात) के वृक्ष का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व बहुत है। लेकिन इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुण सेहत संबंधी कई फायदे प्रदान कर सकता है। चलिए हरसिंगार के फायदे और नुकसान को विस्तार से समझते हैं।

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Brijesh Yadav

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हरसिंगार का पेड़ अपने खुबसूरत सफेद फूलों और मनमोहक खुशबू के लिए जाना जाता है। इस वृक्ष का जिक्र पुराणिक कथाओं और लोक कथाओं में भी किया गया है जो इसकी उपयोगिता, महत्व और प्रशिद्धि को दर्शाता है।  

इसके अलावां भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में भी हमारे सेहत पर हरसिंगार के लाभों का जिक्र मिलता है। इस पेड़ के प्रत्येक भाग जड़, फूल, पत्तों, छाल में औषधीय गुण पाए जाते हैं इसलिए हमारे स्वास्थ्य पर हरसिंगार के फायदों की एक विस्तृत श्रखला देखी जा सकती है।

हालाँकि प्राचीन ग्रंथों में हरसिंगार के फायदों और महत्व का जिक्र मिलता है लेकिन वर्तमान समय में हम इसके लाभों और उपयोगिता से अनजान हैं। तो चलिए इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से हरसिंगार के फायदे और नुकसान के अतरिक्त इसके महत्व, उपयोग आदि के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं ताकी हम अपने सम्पूर्ण स्वास्थ्य का विकास कर सकें।

हरसिंगार की पहचान

हरसिंगार को अन्य कई नामों से जाना जाता है जिसमें प्राजक्‍ता, पारिजात, शेफाली, रात की रानी (night-blooming jasmine), कोरल जैसमीन (coral jasmine) आदि नाम प्रमुख हैं। इसका वैज्ञानिक नाम निक्‍टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस (Nyctanthes arbor-tristis) है जो पौधे की ओलिऐसी (Oleaceae) परिवार से सम्बन्धित है।

हरसिंगार का पेड़ संभवतः10 से 15 फीट ऊँचा होता है लेकिन इसकी उचाई कहीं 25-30 फीट भी हो सकती हैं। इसकी छाल कठोर और दिखने में भूरे रंग की होती है, जिसका उपयोग कई समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है।

हरसिंगार का फूल अमूमन 4 से 5 पंखुड़ियों वाला सफ़ेद रंग का बहुत ही खूबसूरत होता है जिसमें से सुगंधित महक आती है। इसके फूलों की एक खास बात होती है की यह सूर्यास्त के बाद खलते हैं और सुबह सूर्योदय होने तक मुरझा कर गिर जाते हैं। हरसिंगार का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है लेकिन मुख्यतः इसके पत्ते और छाल का उपयोग सेहत से संबंधित फायदों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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हरसिंगार (पारिजात) के फायदे

हरसिंगार विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में फायदेमंद हो सकता है क्योकि इसमें कई प्रकार के औषधीय गुणों जैसे एंटीऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी और जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं।

सूजनरोधी और दर्द निवारक गतिविधि

हरसिंगार का पौधा सूजन-रोधी और दर्द निवारक गतिविधि की क्षमता को पर्दर्शित कर सकता है, यानी शरीर में आये विभिन्न सूजन और दर्द संबंधी स्थितियों के इलाज में इसका उपयोग किया जा सकता है।  

कुछ अध्ययन हरसिंगार के पत्तों के अर्क के एनाल्जेसिक और सूजन-रोधी प्रभाव का समर्थन करते हैं।12

इसके अतिरिक्त इसके तने की छाल भी इन समस्याओं में फायदेमंद हो सकती है।  नोसिसेप्टिव उत्तेजना के कारण कुछ विभिन्न रासायनिक पदार्थ उत्पन्न होते हैं, जो दर्द और सूजन का कारण बनते हैं। ये पदार्थ प्रोस्टाग्लैंडीन, साइटोकिनिन, ब्रैडीकाइनिन, इत्यादि हो सकते हैं। हरसिंगार के तने की छाल के मेथनॉलिक अर्क नोसिसेप्टिव घटक को रोक सकता है जिससे सूजन और दर्द से रहत मिल सकती है। इसके अलावां यह एडिमा जैसी गंभीर समस्या में भी फायदेमंद हो सकता है।3

गठिया रोग में हरसिंगार का उपयोग

हरसिंगार के पौधे में एंटी-रूमेटिक गुण पाए जाते हैं। इसका अर्थ यह है की हरसिंगार  रूमेटॉयड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) यानी गठिया के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। गठिया एक आम और प्रबल जोड़ों की बीमारी है जिसमें मुख्य रूप से पैरों और हाथों के जोड़ों में सूजन, दर्द, होती है।

चूहों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया की पीड़ित चूहों को 500 mg/kg हरसिंगार के पत्तों का अर्क देने से उनमें सूजन संबंधी गठिया में सुधार हुआ। अन्य विश्लेषण जैसे रेडियोग्राफिक में पाया गया कि उनके टखने के जोड़ के पिछले पैरों में सुधार हुआ, और हिस्टोलॉजिकल जांच ने बताया कि पौधे के अर्क के उपचार से गठिया से प्रभावित जानवरों में पैनस गठन, सूजन, और सिनोवियल हाइपरप्लासिया में कमी हुई है।4

मलेरिया में फायदेमंद

हरसिंगार के पौधे में मलेरिया-रोधी गुण पाए जाते हैं इसलिए इसका उपयोग पारम्परिक तौर पर भी मलेरिया के रोकथाम में किया जाता रहा है, जिसके लिए इसके पत्तों का इस्तेमाल जूस या काढ़े के तौर पर किया जाता है।

कुछ अध्ययन इस ओर संकेत करते हैं की हरसिंगार के पत्ते के अर्क में एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स और टेरपेन्स जैसे बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं जो मलेरिया के बुखार को कम करने और परजीवियों को ख़त्म करने में उपयोगी हो सकते हैं। इसलिए हरसिंगार के पत्तों का उपयोग मलेरिया के रोकथाम में किया जा सकता है।5

साइटिका से राहत की संभावनाएं

हरसिंगार का उपयोग साइटिका के लिए परम्परिक चिकित्सा पद्धति में होता आया है। परन्तु साइटिका से सम्बन्धित हरसिंगार के फयदे के विषय में अभी वैज्ञानिक दृष्टिकोण का आभाव है, लेकिन इसमें सूजन-रोधी, एनाल्जेसिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो दर्द निवारक, सूजन को कम करने और मांसपेसियों में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में कारगर शाबित हो सकते है जिसके कारण संभवतः साइटिका के लक्षणों में कमी देखी जा सकती है।

प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यछमता में सुधार

हरसिंगार या अपरिजात प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर सकता है, क्योकि यह एंटीबॉडी का उत्पादन और प्रतिरक्षा कोशिकाओं की कार्य छमता में विकास कर सकता है। जिसके परिणाम स्वरूप संक्रमण को पहचान कर ख़त्म करने की छमता में तेजी आ सकती है और कैंसर कोशिकाओं के वृद्धि में रोकथाम हो सकता है।6

पाचन क्रिया में सुधार

हरसिंगार पेट सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है क्योकि इसमें रेचक (purgative activity) गतिविधि पाई जाती हैं। हरसिंगार का रेचक प्रभाव पाचन को बेहतर और कब्ज को दूर कर सकता है, जिसके कारण मल त्यागने में आसानी होती है और मल द्वार से जुडी समस्याओं में भी फायदा हो सकता है।7

अवसाद और अनिद्रा में फायदेमंद

कुछ अध्ययन इस और संकेत करते हैं की हरसिंगार में अवसादग्रस्त गतिविधि (Depressant activity) पाई जाती है जो तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को धीमा कर सकता है। जिसके कारण नींद की समय अवधि बढ़ती है, तनाव व चिंता में कमी आ सकती हैं, मांसपेशियों में तनाव में कमी आ सकती है।8

हरसिंगार के नुकसान

निश्चित रूप से हरसिंगार या पारिजात एक औषधीय पौधा है जिसके हमारे स्वास्थ्य पर कई लाभ देखे जा सकते हैं। लेकिन स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभव की संभावनाएं भी हो सकती हैं इसलिए इसके उपयोग में सावधानी और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण है।

– कुछ अध्ययन इसमें अल्सरोजेनिक गतिविधियां (ulcerogenic activities) होने का संकेत देते हैं इसलिए इसके अधिक उपयोग से गैस्ट्रिक अल्सर (gastric ulcers) होने की संभावना हो सकती है।  

– हरसिंगार में पाए जाने वाले अवसादग्रस्तता गतिविधि (Depressant activity) संभावित दुष्प्रभावों और जोखिमों को उजागर कर सकता है, जैसे सतर्कता में कमी (Reduced alertness), अस्पष्ट बोल (Slurred speech), अधिक नींद।

हमारे स्वास्थ्य पर हरसिंगार के नुकसान को देखते हुए इसके उपयोग को लेकर सावधानी बरतना अनिवार्य है। इसलिए किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी को देखते हुए डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।

हरसिंगार (पारिजात) का उपयोग

हरसिंगार के वृक्ष के प्रत्येक भाग में औषधीय गुण पाए जाते हैं इसलिए इसके प्रत्येक भाग का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन मुख्य रूप से इसके पत्ते और तने की छाल का ही इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी फायदे प्राप्त करने के लिए किया जाता है।  

हरसिंगार की पत्तियां:- इस पौधे की पत्तियों का जूस निकाल कर सेवन किया जाता सकता है, या इसके काढ़े का उपयोग किया जा सकता है। काढ़ा बनाने के लिए इसके पत्तों को पीस कर 2 से 3 गिलास पानी में अच्छे से उबाल लें और छान कर उपयोग करें। इसके पत्तियों को पीस कर सूजन वाले जगह पर भी लगाया जा सकता है।

हरसिंगार का तना:- इसके तने की छाल का पेस्ट बना कर उपयोग में लाया जा सकता है। और छाल का पाउडर का उपयोग पानी या दूध के साथ किया जा सकता है।

निष्कर्ष

हरसिंगार जिसे पारिजात, रात की रानी, प्राजक्‍ता आदि नामों से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम निक्‍टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस (Nyctanthes arbor-tristis) है जो पौधे की ओलिऐसी (Oleaceae) परिवार से सम्बन्धित है। हमारे स्वास्थ्य पर हरसिंगार के फायदे कई हो सकते हैं जैसे यह सूजनरोधी और दर्द निवारक गतिविधि प्रदर्शित कर सकता है, गठिया रोग, मलेरिया, साइटिका जैसे समस्याओं में फायदेमंद हो सकता है। मुख्य रूप से इसके पत्तों और तने की छाल का ही उपयोग किया जाता है लेकिन इसका प्रत्येक भाग का उपयोग किया जा सकता है।

हालाँकि हरसिंगार के नुकसान की भी संभावना भी होती है जैसे गैस्ट्रिक अल्सर, सतर्कता में कमी, अस्पष्ट बोल, अधिक नींद आदि। इसलिए इसके उपयोग और किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी उत्त्पन होने पर डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।

संदर्भ

  1. Saxena, R. S., et al. “Study of anti-inflammatory activity in the leaves of Nyctanthes arbor tristis Linn.—an Indian medicinal plant.Journal of Ethnopharmacology 11.3 (1984): 319-330. ↩︎
  2. Pattanayak, Chaitali, et al. “Evaluation of anti-inflammatory activity of nyctanthes arbor-tristis leaves.Int J Med Pharm Sci 3.09 (2013). ↩︎
  3. Kakoti, Bibhuti Bhusan, et al. “Analgesic and anti-inflammatory activities of the methanolic stem bark extract of Nyctanthes arbor-tristis linn.BioMed research international 2013 (2013). ↩︎
  4. Sharma, Ayushi et al. “Analysis of anti-rheumatic activity of Nyctanthes arbor-tristis via in vivo and pharmacovigilance approaches.Frontiers in pharmacology vol. 14 1307799. 5 Dec. 2023, doi:10.3389/fphar.2023.1307799 ↩︎
  5. Das, Lopamudra et al. “Evaluation of In vivo Antimalarial Property of Nyctanthes arbor-tristis (Night Jasmine) Leaves.Journal of pharmacy & bioallied sciences vol. 13,Suppl 2 (2021): S1088-S1092. doi:10.4103/jpbs.jpbs_167_21 ↩︎
  6. Bharshiv, Chandrabhan Kumar et al. “Immunomodulatory activity of aqueous extract of Nyctanthes arbor-tristis flowers with particular reference to splenocytes proliferation and cytokines induction.Indian journal of pharmacology vol. 48,4 (2016): 412-417. doi:10.4103/0253-7613.186210 ↩︎
  7. Saxena, R S et al. “Tranquilizing, antihistaminic and purgative activity of Nyctanthes arbor tristis leaf extract.Journal of ethnopharmacology vol. 81,3 (2002): 321-5. doi:10.1016/s0378-8741(02)00088-0 ↩︎
  8. Das, Sanjita et al. “Evaluation of CNS Depressant Activity of Different Plant parts of Nyctanthes arbortristis Linn.Indian journal of pharmaceutical sciences vol. 70,6 (2008): 803-6. doi:10.4103/0250-474X.49129 ↩︎

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